‘हवाओं से कह दो कि अपनी औकात में रहें, हम पैरों से नहीं हौंसलों से उड़ते हैं’
‘तुन दिये बादें मुखालिफ से न घबरा ऐ उकाब, ये तो चलती है तुम्हें उंचा उड़ाने के लिए’।
हिंदुस्तान के मशहूर शायर की इन पंक्तियों को मेवात के कई दिव्यांगों ने न केवल दौहराया है बल्कि वे दूसरों के लिए भी नजीर बनकर उभरे। आज विश्व विकलांगजन दिवस है जिले में करीब 19 हजार अशक्त हैं। कुछ ऐसे भी हैं जो आज भी अपना प्रमाणपत्र बनवाने के लिए भटक रहे हैं। इनमें से कुछ ऐसे हैं जिन्होंने अपंगता को बोना साबित किया। इनमें ज्यादातर ऐसे हैं जिन्होंने किराने की दुकानें खोली हुई हैं। कई ऐसे हैं जो आटोरिक्शा चलाकर अपने परिवारों का पालन पोषण करने में जुटे हुए हैं।
करहेड़ा गांव के अब्दुल रहमान सौ प्रतिशत दिव्याांग है उन्होंने 2009 में अपना प्रमाण पत्र कार्यकर्ता राजुद्दीन की मदद से बनवाया था। और आज नगीना कस्बे में फलों की दुकान चलते हैं। वहीं कंसाली गांव के अरसद प्रतिदिन नगीना से बडक़ली चौक के बीच थ्रीव्हीलर चलाकर अपने परिजनों का सहारा बने हुए है। खेड़ला गांव के जननू भी दोनों पैरों से अपाहिज है जो नूंह शहर में कोल्डड्रिंक की छोटी से दुकानदारी करते हैं। मेवात के स्कूलों में करीब चार हजार विकलांग शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इनमें कुछ ऐसे अपाहिज भी हैं जो सरकारी नौकरी कर रहे हैं।
उनमें से गांव खेड़ीकलां के मोहम्मद हसीन सन् 2013 में ग्राम सचिव लगे। मालब गांव की अमानत दो किलोमीटर बैशाखी से चलकर 12वीं की शिक्षा ग्रहण करी है। इनमें ज्यादातर विकलांग पोलियो वायरस की चपेट में आने से हुए हैं। बीते साल अब तक 613 बच्चों के मल के सैम्पल जांचे गये हैं। मेवात में पोलियो का आखिरी केस 10 जनवरी 2010 को पिनगवां कस्बे में मिला था। अपंग लोगों के लिए दो दशक से काम कर रही सामाजसेवी राजुद्दीन के सहयोग से जिले के लगभग 15 हजार विकलांगों को चिन्ह्ति कर सर्टिफिकेट बनवाये हैे। साथ ही हजारों विकलांगों की सर्जरी के अलावा ट्राईसाईकिल, बैशाखी, सुनने वाली मशीन, कृत्रिम अंग, व्हील चेयर इत्यादि उपकरण दिलवाई। इनमें से तीन हजार विकलांगों को पेंशन के लिए पंजीकृत भी करवाया।
वहीं आरटीआई मंच भी पिछले दो दशक से मेवात में विकलांगों के लिए काम करने में जुटी है। इसके परिणाम देखने में भी आऐ। मेवात के प्रथम सीएमओ डॉ. वैदप्रकाश महेश्वरी ने बातचीत में बताया कि जब मैंने 2005 में मेवात का चार्ज संभाला था तो अशक्तों के प्रमाण पत्र गुडगांव व फरीदाबाद से बनते थे। तब जुझारू कर्मठ सामाजिक कार्यकर्ता राजुद्दीन मेरे पीछे पड गए और मैने उन्हीं के आग्रह पर झज्जर से आवेदन फार्म मंगवाया जो मेवात के नाम से करवाया। उन्होंने बताया कि लगातार राजुद्दीन के निस्वार्थ सहयोग से करीब दस हजार विकलांगों के सर्टिफिकेट बनवाऐ।
जिला रेडक्रॉस सोसायटी सचिव वाजिद अली बताते हैं कि साल 2014-15 के दौरान साठ लाख रूपये के उपकरण बांटे गये। उनमें 375 व्हील चेयर, 700 ट्राई साईकिल, 800 बैशाखी, 200 कानों से सुनने वाली मशीन, 150 कृत्रिम अंग, 40 मंदबुद्धि बच्चों का ईलाज करवाये है। सिविल सर्जन डॉ. श्रीराम सिवाच ने बताया कि प्रत्येक बुधवार को जिला अस्पताल अलआफिया मांडीखेड़ा में दिव्यागों के सर्टिफिकेट कमेटी द्वारा बनाये जाते हैं। जिलेभर में अब तक मुफत सर्जरी की योजना के सैंकड़ों दिव्यांगों के ऑपरेशन करे हैं।

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