छात्रों को सिविल इंजीनियरिंग से जुड़े नैतिक मूल्यों से कराया अवगत

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Faridabad/Alive News : जे.सी. बोस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्याaलय, वाईएमसीए, फरीदाबाद के सिविल इंजीनियरिंग विभाग द्वारा ‘सिविल इंजीनियरिंग में ढांचागत डिजाइन एवं परियोजना प्रबंधन’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला आज प्रारंभ हो गई। कार्यशाला का आयोजन राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज, अम्बेडकर नगर तथा औद्योगिक सहयोग से टीईक्यूआईपी-3 के अंतर्गत किया जा रहा है।

कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण में पूर्व प्रबंधक एवं परियोजना निदेशक अशोक कुमार गुप्ता मुख्य अतिथि रहे तथा विद्यार्थियों को सिविल इंजीनियरिंग से जुड़े नैतिक मूल्यों से अवगत करवाया। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने तकनीकी कौशल में सुधार लाने के लिए भी प्रेरित किया।

सत्र में आईआईटी दिल्ली के प्रोफेसर डॉ नीरज कुमार तथा सीएसआईआर-केन्द्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली की मुख्य वैज्ञानिक डॉ. अनुराधा शुक्ला विशिष्ट अतिथि रही। इस अवसर पर डीन इंस्टीट्यूशन्स डॉ. संदीप ग्रोवर, डीन मैनेजमेंट डॉ. अरविंद गुप्ता तथा कुलसचिव डॉ. संजय कुमार शर्मा भी उपस्थित थे।

इस अवसर पर बोलते हुए डॉ. नीरज झा ने लागत तथा समयबद्ध परियोजना पूर्णता की दृष्टि से परियोजना प्रबंधन के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कुल एक तिहाई परियोजनाएं खराब प्रबंधन के कारण प्रभावित होती है। इसलिए, सिविल इंजीनियर्स को परियोजना प्रबंधन तथा ढांचागत डिजाइन से संबंधित पूरा ज्ञान एवं कौशल हासिल करना चाहिए। सत्र को संबोधित करते हुए डॉ. अनुराधा शुक्ला ने सिविल इंजीनियरिंग परियोजनाओं से संबंधित विभिन्न पर्यावरणीय पहलुओं पर प्रकाश डाला।
सत्र को संबोधित करते हुए डॉ. तिलक राज ने कहा कि कार्यशाला के लिए चयनित विषय प्रासंगिक है क्योंकि ढांचागत डिजाइन में फिजिक्स, मैथ व मेटिरियल साइंस के सिद्धांत लागू होते है, जिससे विद्यार्थियों को इस विषय की बेहतर समझ बन सकेगी। उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्यशाला से विद्यार्थियों को कौशल प्रशिक्षण तथा औद्योगिक जरूरतों के अनुरूप तकनीकी ज्ञान हासिल करने में मदद मिलती है। इससे पूर्व, सिविल इंजीनियरिंग विभाग के अध्यक्ष डॉ. एम.एल. अग्रवाल ने दो दिवसीय कार्यशाला से संबंधित विस्तृत जानकारी प्रदान की। कार्यशाला का संचालन डॉ. कृष्ण कुमार की देखरेख में किया जा रहा है।

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