स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद नहीं रहे, 111 दिन के अनशन के बाद निधन

0
149

Faridabad/Alive News : अविरल और निर्मल गंगा के लिए विशेष एक्ट पास कराने की मांग को लेकर 111 दिन से आमरण अनशन कर रहे स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद का आज दोपहर एम्स ऋषिकेश में निधन हो गया। बुधवार को स्वामी सांनद को एम्स ऋषिकेश में भर्ती कराया गया था। बताया जा रहा है कि स्वामी सांनद ने मंगलवार को ही जल त्याग दिया था। वह 22 जून से गंगा के लिए कानून बनाने की मांग को लेकर अनशन पर बैठे थे। स्वामी ज्ञान स्वरूप सानन्द (जन्म 20 जुलाई 1932) भारत के प्रसिद्ध पर्यावरण प्रेमी थे । उनका मूल नाम जी.डी अग्रवाल था। सम्प्रति वे महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय में पर्यावरण विज्ञान के मानद प्राध्यापक (ऑनरेरी प्रोफेसर) हैं। 2009 में भागीरथी नदी पर बांध निर्माण रुकवाने के लिये उन्होने अनशन आरम्भ किया था जो सफल रहा।

अनशन स्थल से पुलिस स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद को साथ AMIS में ले जाती हुई। (वायरल फोटो)

वे आईआईटी, कानपुर के सिविल इंजीनियरिंग और पर्यावरण विभाग में प्राध्यापक, केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में प्रथम सचिव और राष्ट्रीय नदी संरक्षण निदेशालय के सलाहकार रह चुके हैं। बता दें कि पर्यावरणविद् और एक्टिविस्ट स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद उर्फ जी.डी अग्रवाल गंगा की सफ़ाई को लेकर हरिद्वार में आमरण अनशन पर बैठे थे। बाद में उन्हें जबरन एम्स ऋषिकेश में भर्ती करा दिया गया था। भर्ती होने के बावजूद प्रो अग्रवाल अपना अनशन जारी रखे हुए थे। इस पूरे मुद्दे को आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने संसद में उठाने की बात भी की थी। इससे पहले केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और उमा भारती पत्र लिखकर प्रो. जी.डी अग्रवाल को मनाने की कोशिश कर चुके थे।

(फोटो: ट्विटर @matrisadan)

इसके जवाब में उन्होंने लिखा था कि उन्होंने फ़रवरी में प्रधानमंत्री मोदी को गंगा की सफ़ाई के लिए पत्र लिखा था, जिसका उन्हें कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने आमरण अनशन पर जाने का निर्णय लिया। आमरण अनशन की जानकारी 13 जून को प्रधानमंत्री को लिखकर दी गई थी। उमा भारती स्वामी सानंद को अपना बड़ा भाई कहती रही थी इसलिए पत्र के अंत में स्वामी सानंद ने लिखा था कि ‘अगर जीवित रहा तो रक्षाबंधन में याद कर लेना’। इससे पहले स्वामी सानंद 2009 में भागीरथी पर डैम बनाने को रोकने के लिए भी सफ़ल अनशन कर चुके थे। बता दें कि स्वामी सानंद सन्यास लेने से पहले सीपीसीबी के पहले मेंबर सचिव रह चुके हैं जबकि पर्यावरण वैज्ञानिक के रूप में वह आइआइटी कानपुर सहित विभिन्न संस्थानों में अध्‍यापन कर चुके हैं।

अभी 12 जुलाई को हरिद्वार मातृ सदन के स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद की पुलिस गिरफ्तारी मामले में नैनीताल हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया था। हाईकोर्ट ने इस मामले में प्रदेश के मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह को आदेश दिए थे कि वह 12 घंटों के भीतर स्वामी से मिलकर उनकी मांगों को पूरा करें। इसके साथ ही उस जगह को भी सार्वजनिक किया जाए जहां स्वामी ज्ञान स्वरूप को रखा गया है। फर्जी, सत्ता, अहंकारी, सत्ता के दलाल संत-बाबाओं से भरी दुनिया में गंगा की अविरल धारा के लिए एक संत का भूख से मर जाना इस देश के लिए कलंक है।

मशहूर पर्यावरणविद जी डी अग्रवाल आईआईटी कानपुर से सेवानिवृत्त प्रोफेसर थे. जिन्होंने सेवानिवृत्त होने के बाद शंकराचार्य स्‍वामी स्‍वरूपानंद सरस्‍वती के प्रतिनिधि स्‍वामी अविमुक्‍तेश्‍वरानंद से संत की दीक्षा ली थी. दीक्षा लेने के बाद उन्हें ज्ञानस्वरूप सानंद के नाम से जाना जाने लगा. जी डी अग्रवाल ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से अंतिम इच्छा जाहिर करते हुए कहा था कि मरणोपरांत उनके शरीर को वाराणसी के काशी हिंदू विश्वविद्यालय को दे दिया जाए.

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने ‘एक चैनेल ‘ से बातचीत में बताया कि उनकी गुरुवार सुबह संत सानंद से बात हुई थी और उन्होंने कहा कि डॉक्टरों ने बोला है कि उनके शरीर में पोटैशियम की कमी है, लिहाजा उन्होंने आईवी से पोटैशियम का डोज लिया है. अविमुक्तेश्वरानंद ने सरकार पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि जैसा संत निगमानंद के साथ हुआ वैसा ही संत सानंद के साथ भी हुआ है. जो भी गंगा के बारे में बोलेगा मार दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि वे इसे प्रोफेसर अग्रवाल की हत्या मानते हैं. इसलिए एम्स प्रशासन से पत्र लिखकर मांग करने जा रहे हैं कि उनके शव का पोस्टमॉर्टम कर तथ्य जनता के सामने रखें.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here