स्वाति मालीवाल का अनशन जारी, बोलीं- निर्भया के दोषी अभी भी सरकारी मेहमान

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New Delhi/Alive News : महिलाओं पर हो रहे अत्याचार के विरोध में दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल का आमरण अनशन चौथे दिन भी जारी है। मालीवाल ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को पत्र लिखकर दुष्कर्म मामलों में छह माह के भीतर कठोर सजा के प्रावधान की मांग की है। साथ ही निर्भया के दोषियों की सजा माफ नहीं करने की अपील भी की है। इससे पहले मालीवाल प्रधानमंत्री और सभी महिला सांसदों को भी पत्र लिख चुकी हैं।

तीसरे दिन बृहस्पतिवार को स्वाति मालीवाल सुबह राजघाट स्थित महात्मा गांधी की समाधिस्थल पर पहुंचीं। यहां उन्होंने बापू को श्रद्धांजलि देने के बाद कुछ देर तक ध्यान किया। इसके बाद वह समता स्थल पर पहुंची। दो दिन पहले स्वाति मालीवाल ने दिल्ली के जंतर- मंतर से धरना शुरू किया था।

हालांकि पुलिस ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए इन्हें समता स्थल पर विरोध जारी रखने के लिए जगह तय की। बुधवार से स्वाति मालीवाल राजघाट स्थित समता स्थल पर आमरण अनशन पर हैं। उनके समर्थन में सैकड़ों महिलाएं, युवतियां, छात्राएं और स्कूली बच्चियां मौजूद रहीं।

राष्ट्रपति को लिखे पत्र में मालीवाल ने कहा है कि देश में महिलाओं के प्रति अत्याचार में लगातार इजाफा हो रहा है। हैदराबाद में एक महिला डॉक्टर के साथ जघन्य अपराध हुआ। राजस्थान में 6 वर्ष की स्कूल छात्रा से एक व्यक्ति ने दुष्कर्म किया और उसकी आंखें बाहर निकाल दीं।

बृहस्पतिवार को उत्तर प्रदेश में भी दुष्कर्म पीड़िता को जलाकर मारने की कोशिश की गई। राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो के अनुसार दिल्ली में हर दिन कम से कम तीन बच्चियों के साथ दुष्कर्म की घटनाएं देखने को मिल रही हैं। मालीवाल ने कहा कि मांगें पूरी नहीं होने तक विरोध जारी रहेगा।

राष्ट्रपति से 5 मुद्दों पर मांगा सहयोग
मालीवाल ने राष्ट्रपति से पांच मुद्दों पर सहयोग मांगा है। उन्होंने लिखा है कि निर्भया के दोषियों को तत्काल फांसी पर लटका देना चाहिए। साथ ही दुष्कर्म मामले में तीन माह के भीतर ही ट्रायल पूरा होना चाहिए। पीड़िता को गारंटी के साथ 6 माह के भीतर न्याय मिलना चाहिए। इसके अलावा पिछले 13 वर्ष से दिल्ली पुलिस में चल रही जवानों की कमी को तत्काल दूर करने की दिशा में काम होना चाहिए। फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना, निर्भया फंड का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल और पुलिस की जवाबदेही तय होना बेहद जरूरी है।

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