21वीं सदी में तकनीकी शिक्षा विश्वभर की डिमांड : प्रो.कप्तान सिंह सोलंकी

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Faridabad/Alive News : हरियाणा के महामहिम राज्यपाल प्रो.कप्तान सिंह सोलंकी ने कहा कि तकनीकी शिक्षा 21वीं शताब्दी के भारत ही नहीं अपितु विश्व की सबसे बड़ी जरूरत है। आज वे ही देश प्रगति के पथ पर अग्रसर है जो तकनीकी रूप से सशक्त है। महामहिम राज्यपाल प्रो.सोलंकी जोकि वाईएमसीए विश्वविद्यालय के कुलाधिपति भी है, आज विश्वविद्यालय के द्वितीय दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे।

हरियाणा के शिक्षा मंत्री राम बिलास शर्मा ने समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे। दीक्षांत समारोह को कुलपति दिनेश कुमार तथा आईआईटी रूडक़ी के पूर्व निदेशक प्रो. प्रेम व्रत ने भी संबोधित किया। दीक्षांत समारोह में वर्ष 2014 से 2016 तक विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों से पीएचडीए स्नातकोत्तर तथा स्नातक परीक्षाएं उत्तीर्ण करने वाले कुल 2072 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गई।

विश्वविद्यालय ने 20 पीएचडीए 769 स्नातकोत्तर तथा 1283 स्नातक उपाधियों के साथ विभिन्न पाठ्यक्रमों के मेधावी विद्यार्थियों को 13 स्वर्ण पदक प्रदान किये गये। दीक्षांत समारोह का शुभारंभ दीप प्रज्वलन तथा विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ। अपने अध्यक्षीय संबोधन में महामहिम राज्यपाल ने डिग्री प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को शुभकामनाएं दी और कहा कि विद्यार्थी अपने जीवन में जिम्मेदारी और नैतिकता के गुणों का आत्मसात करें। विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करते हुए उन्होंने कहा कि इस विश्वविद्यालय के विद्यार्थी भाग्यशाली है, जिन्हें तकनीकी शिक्षा हासिल हुई है जोकि 21वीं सदी में देश ही नहीं अपितु विश्वभर की मांग है।

उन्होंने कहा कि विद्यार्थी शिक्षा को राष्ट्र की प्रगति का माध्यम बनाये। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों द्वारा अर्जित डिग्री दिखावा मात्र नहीं होनी चाहिए बल्कि यह समाज व राष्ट्र की प्रगति के लिए होनी चाहिए क्योंकि देश का भविष्य विश्वविद्यालयों में पढऩे वाले विद्यार्थियों पर निर्भर करता है। इस अवसर पर बोलते हुए शिक्षा मंत्री राम बिलास शर्मा ने कहा कि शिक्षण संस्थानों में दीक्षांत समारोह की परम्परा गुरू व शिष्य के बीच संबंध का परिचायक है जो विद्यार्थियों को उनकी जिम्मेदारियों का अहसास करवाती है।

उन्होंने कहा कि आज के वैश्विक तथा व्यवसायिक दौर में सूचना तथा ज्ञान के बीच अंतर नहीं रहा है। इंटरनेट के माध्यम से उपलब्ध सूचनाओं को ही पर्याप्त ज्ञान मान लिया जाता है। उन्होंने पश्चिम एवं पूर्वी के बीच की विचारधारा का भी उल्लेख कियाए जिसमें कलाए ज्ञान एवं संस्कृति के बीच बड़ा अंतर है। समारोह के अंत में कुल सचिव प्रो. संजय कुमार शर्मा द्वारा धन्यवाद प्रस्ताव द्वारा हुआ तथा समारोह राष्ट्रगान के साथ संपन्न हुआ।

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