क्या आप जानते हैं गलत जानकारी के मामले में पांचवे नंबर पर भारत?

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New Delhi/Alive News : हमारे देश में कई सारी बातें ऐसी होती हैं जिसकी हकीकत कुछ और होती है लेकिन लोगों में वह दूसरी तरह से पहुंचाई जाती है। इसकी वजह कुछ भी हो सकती है। राजनीति की ही यदि बात करें तो इन्‍हें बार-बार दोहराकर झूठ को सच बनाने की कोशिश होती रहती है। हाल ही में एक सर्वे की रिपोर्ट सामने आई है जिसमें भारतीयों की गलत जानकारी का खुलासा होता है। यह सर्वे IPSOS-MORI ने किया है। आपको बता दें कि गलत जानकारी के मामले में भारत पांचवे नंबर पर आता है। यह सर्वे 38 देशों में किया गया है। इस सर्वे में पहले नंबर पर दक्षिण अफ्रीका, दूसरे पर मैक्सिको, तीसरे पर ब्राजील और चौथे पर पेरू आता है।

भारत में मुस्लिम जनसंख्‍या की गलत जानकारी
इन आंकड़ों में कई बातों का खुलासा हुआ है। यह खुलासा हमें इस बात की जानकारी देता है कि हमें किस तरह की बातों को तोड़-मरोड़कर पेश किया जाता है और फिर उस पर बेवजह की बहस की जाती है। आकंड़े बताते हैं कि हमारे देश में मुस्लिम समुदाय कुल जनसंख्‍या का करीब 27.8 फीसद है, जबकि कहा जाता है कि यह केवल 14.2 फीसद है। लेकिन राजनीतिक फायदे के लिए कभी भी इसकी सच्‍ची तस्‍वीर सामने नहीं रखी जाती है। यही हाल 15-19 वर्ष की आयु के बीच बच्‍चों को जन्‍म देने वाली लड़कियों के बारे में भी है। दरअसल, भारतीयों को लगता है कि यह करीब 26 फीसद है, लेकिन हकीकत में यह महज 2.3 फीसद ही है।

हत्‍या के मामलों में भी गलत हैं हम
ऐसा ही कुछ जानकारी हमारी भारत में हत्‍याओं को लेकर भी है। शायद आपको भी ऐसी ही जानकारी होगी। बहरहाल, आपको बता दें कि वर्ष 2000 के बाद से देश में हत्‍याओं के मामलों में करीब 30 फीसद की कमी आयी है। लेकिन हाईप्रोफाइल मामलों की यदि बात करें तो महिलाओं और बच्‍चों के खिलाफ हुए मामलों में जरूर तेजी आई है। अब जरा इधर भी गौर कर लें। हमारे यहां पर ज्‍यादातर लोगों को इस बात की गलतफहमी है कि देश की जेलों में करीब 17.4 फीसद विदेशी बंद हैं। लेकिन यह आंकड़ा सही नहीं है। देश की जेलों में करीब डेढ़ फीसद विदेशी बंद हैं। इनमें से सबसे अधिक पश्चिम बंगाल की जेल में हैं। इनमें भी ज्‍यादातर बांग्‍लादेशी हैं। इसके अलावा नाइजीरिया, म्‍यांमार, नेपाल और पाकिस्‍तान के हैं।

कितने हैं मोटापे के शिकार
भारत में लोगों का मानना है कि ज्‍यादातर लोग मोटापे का शिकार हैं। इनमें से 20 वर्ष की आयु वालों की संख्‍या ज्‍यादा है। लेकिन यह भी सच नहीं है। हकीकत यह है कि 20 वर्ष की आयु वाले युवा जो मोटापे की समस्‍या से जूझ रहे हैं वह करीब 20 फीसद हैं जबकि हमारी निगाह में यह करीब 41 फीसद है। अब जरा सोशल मीडिया के इस्‍तेमाल की तरफ अपना रुख कर लेते हैं। दरअसल, भारतीय मानते हैं कि देश में 13 वर्ष या उससे अधिक की आयु के बच्‍चों का फेसबुक अकाउंट करीब 63.3 फीसद है, जबकि इसका सही आंकड़ा इससे कहीं कम करीब 19.2 फीसद ही है।

यहां पर भी गलत सोच
अमेरिका जाने की चाहत रखने वाले आपको हर जगह मिल जाएंगे। वहीं ज्‍यादातर लोगों का यह भी कहना है कि अमेरिका में मुस्लिम को लेकर भेदभाव किया जाता है। इस तरह की। यह सोच रखने वाले करीब 16.6 फीसद है जबकि हकीकत में इस तरह की सोच रखने वाले महज एक फीसद ही हैं। वहीं अमेरिकियों को लगता है कि यहां पर बाहरी लोग करीब 33 फीसद हैं, जबकि यह केवल 14.3 फीसद ही हैं। अब एक नजर आपके खुश रहने के बारे में डाल लेते हैं। भारतीयों को लगता है कि यहां पर केवल 46.9 फीसद लोग ही खुश हैं, जबकि ऐसा नहीं है। भारत में खुश रहने वाले करीब 80.8 फीसद हैं।

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