संतो को बदनाम कर रहे हैं बलात्कारी बाबा…

0
40
राकेश शर्मा, कुरुक्षेत्र

देश में असंख्य लोग अपने दुखों ओर कष्टों को कम करने के लिए संतो के पास जाते है उनके बताये हुए रास्ते पर चलकर, प्रवचन सुनकर अपने आप में बदलाव करने की कोशिश करते रहते है क्योकि उनको पता है कि संत समाज एक ऐसा वर्ग है जो देश की जनता की भलाई के लिए कार्य करता रहा है। संत समाज का इतिहास आज का इतिहास नही अपितु युगो-युगो से संत समाज ने देश व दुनिया को धर्म के रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित किया और उसके कई उदाहरण इतिहास के पन्नों पर भी है। किसी ने अपना घर परिवार संत बनने के लिए त्याग दिया तो किसी ने गांव-गांव में घुमकर अलख जगाने का काम किया, ताकि समाज को नई दिशा की ओर अग्रसर किया जा सके ओर परिणाम भी आये। संत समाज ने देश को अलग पहचान दिलाई और कई सामाजिक कुरीतियों को खत्म करने के लिए संतो ने अहम भूमिका निभाई।

लेकिन आज समय बदल गया है संत समाज को बदनाम करने के लिए देश में बाबाओं की भरमार हो गई है। बाबाओं ने अपनी सुविधा अनुसार अपने अपने अनुयायियों की एक फौज तैयार कर ली है और ये अनुयायी भी अपने बाबा को अपना भगवान मान चुके है और सब कुछ अर्पण करते चले जा रहे है। अब परिवर्तन हम सब के सामने है बाबाओं के प्रवर्चनों की मिडिय़ा में भी पूरी तरह से भरमार है । किसी ना किसी रूप में सुर्खियों बटोरने का काम आज बाबा पूरी तरह कर रहे हैं, उसका क्या असर हमारे समाज पर पड़ रहा है शायद ये कोई नही जानता। आज के बाबा खुद-ब-खुद मायाजाल में फंसता जा रहा है, अपना साम्राज्य खड़ा करने में कोई कोर कसर नही छोड़ रहा है।

जिसके परिणाम हमें समय पर मिलते भी रहते है। लेकिन जो आज के बाबा कर रहे है या फिर यू कहें जब किसी बाबा पर किसी भी प्रकार का आरोप लगता है तो देश के संत समाज के साथ साथ उनसे जुड़े अंसख्य अनुयायियों के मन और आस्था को जो ठेस पहुंच रही है शायद, ये कोई नही जानता। संत समाज को बदनाम करने के लिए बाबाओं की लिस्ट भी अब दिन प्रतिदिन लम्बी होती जा रही है और ये कहना भी अतिशोक्ति नही होगा कि क्या सतों को बदमान कर रहे है अपराधी, बलात्कारी बाबा या फिर फर्जी बाबा ?

संत का चौला पहन, बड़े बड़े दरबार लगाये जा रहे है बाबाओं के इर्द-गिर्द सुरक्षा का चक्कर , बड़ी बड़ी कारें, बगलें , ओर नौकर चाकर की क्या जरूरत है किसी बाबा को आखिर ये साम्राज्य कम समय में किस प्रकार खड़ा हो सकता है। बाबाओं की अलग दुनिया जिसमें ये ढ़ोगी, बलात्कारी, ओर अपराधी बाबा पूरी तरह से अपने भक्तों के पैसों से ऐश कर रहे है। इन बाबाओं के सामने कानून व्यवस्था बौनी पड़ती दिखाई दे रही है। बाबाओं न अपनी पकड़ हर उस वर्ग में बना ली है जिसके लिए शायद उन्होनें इस मार्ग को चुना, और चाहे वह राजनीति का मार्ग ही क्यों ना हो राजनीति में बाबाओं की पकड़ किसी से नही छुपी ओर किस प्रकार देश के राजनेता अपनी राजनीति को चमकाने के लिए इनके दरबार में हाजरी लगा रहे है ये भी किसी से छुपाया नही जा सकता। ओर फिर बाबा भी राजनीति में आकर बड़े पदों पर आसीन होकर जनता की भल्लाई के कार्य करने दावे कर रहे है ये भी छुपाया नही जा सकता।

लेकिन इन सब को देखते हुए भारतीय अखाड़ों ने संज्ञान लिया जो बाबा धन बल , राजनीति का प्रभाव दिखाकर अखाड़ों से उपाधि ले जाने में कामयाब हो जाते है। और फिर उनका दुप्रयोग करके देश के असंख्या भक्तों के मन की आस्था को ठेस पहुंचाने का काम किया करते थे। अखाड़े की बैठक के दौरान कई बाबाओं के नामों पर चर्चा की गई ओर एक लिस्ट जारी की गई जिनके उपर आरोप तय हो गये है और उनके जेल के पीछे भेजा जा चुका है या फिर कोर्ट कचहरी के फेर में फंस गये है। यदि नामों के पर एक नजर डाली जाए तो आसाराम, राधे मां, सच्चिानंद, गुरमीत राम रहीम, निर्मल बाबा, रामपाल बाबा, ओम बाबा, भीमानंद महाराज, आचार्य कुशमुनि, नरायण साई, मलखान सिंह ओर वृहस्पति गिरी के नाम प्रमुखता से लिये गये है।

अब सवाल ये उठता है कि इन बाबाओं के साम्राज्य के पीछे किसके हाथ है ये कोई नही जानता आखिर कुछ समय के अंतराल में ही इतना बड़ा साम्राज्य कैसे खड़ा हो सकता है जो ये बाबा करके दिखाने में कामयाब हो रहे है। बाबाओं के दरबार में राजनीतिक के धुरंधरों की हाजिरी अक्सर देखी जाती रही है ओर दिल खोल कर दान देने की प्रक्रिया भी हगहाजिर है। क्या बाबाओं और नेताओं के सम्बंध इस लिए मजबूर हो गये है कि उनको एक दुसरे कि जरूरत अक्सर पड़ती रहती है या फिर युं कहे कि वोट बैंक को मजबूत करने के लिए नेताओं को दरबार में हाजिरी लगना मजबूरी हो गया है। जब भी किसी बाबाओं के काले कारनामे का चि_ा जनता के सामने आता है तो कई खुल्लासे कर देते है सम्पति का ब्यौरा, असला, चौकनों वाले जो खुल्लासे किये जाते है उससे देश के आमजन को ठेस पहुंचती है।

क्या देश में ऐसा कोई सरकारी तंत्र नही है जो इन बाबाओं के साम्राज्य के पनपने की भनक तक ले सके ? आखिर कब तक देश के ढ़ोगी बाबाओं के कारण संत समाज बदनाम होता रहेगा क्या राजनीति ओर बाबा के सम्बंध ओर मजबूती के साथ उभर कर सामने आते रहेगे ? क्या इन ढ़ोगी ओर फर्जो बाबाओं पर नकेल कस सकेगी देश की सरकारे? और यदि ऐसा ही चलता ही रहा तो वो दिन दूर नही जब संत समाज की परिभाषा बदल जाएगी। लेख में पत्रकार के अपने निजी विचार हैं।

(लेखक एक पत्रकार हैं)

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here