Palwal/Alive News : हरियाणा विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय में रविवार को भारत की प्राचीन तथा लुप्तप्राय: लिपियों जैसे ब्राह्मी लिपि व शारदा लिपि के संरक्षण व संवर्धन विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यशाला में वक्ताओं ने बताया की कि संस्कृत भाषा की मूल लिपि शारदा लिपि है जिसे बाद में देवनागरी लिपि में लिखा जाने लगा। शारदा लिपि कश्मीर में मु य रूप से प्रचलित थी, परंतु अब वह लिपि लगभग लुप्तप्राय: हो गई है। परंतु इस लिपि में लिखे हुए अनेक पांडुलेख आज भी मौजूद हैं।

इसी तरह ब्राह्मी लिपि भी पूरे संसार की समस्त लिपियों की जननी है। ब्राह्मी लिपि इस सृष्टि की आदि लिपि कही जाती है। ब्राह्मी लिपि से दो लिपियों के निकलने का प्रमाण मिलता है, उत्तर ब्राह्मी तथा दक्षिण ब्राह्मी। उत्तर ब्राह्मी से उत्तर भारत की समस्त लिपि निकली, जिनमे शारदा, डोगरी, गुरमुखी, नागरी, देवनागरी, असमिया, गुजराती प्रमुख हैं।

इसी तरह दक्षिण ब्राह्मी लिपि से दक्षिण भारत की अनेक लिपियां जैसे तेलुगु, तमिल, कन्नड़, मलयालम आदि निकली हैं। आज की तिथि में शारदा और ब्राह्मी लिपि लगभग लुप्तप्राय: हो चुकी है, जबकि इन दोनों भाषाओं के लगभग एक लाख पुरातत्व लेख आज भी मौजूद है, जो अनुवाद की इंतजार कर रहे हैं। भारत के समृद्ध इतिहास व पुरानी भारतीय धरोहर को जानने और समझने के लिए इन लिपियों का जानना और समझना बहुत आवश्यक है तथा उसके बाद इन पुरातत्व लेखों को अनुवाद करके उन में लिखी हुई बातों को समझा जा सकता है।

हरियाणा विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित इस कार्यशाला में शारदा लिपि के बारे में मु य विद्वान उदय काकरू, शशि शेखर टोश्वानी तथा हीरालाल वांगनू उपस्थित थे तथा साथ ही ब्राह्मी लिपि के मु य जानकार डॉक्टर श्रेयांस द्विवेदी, उपाध्यक्ष हरियाणा संस्कृत अकादमी, डॉक्टर सुरेंद्र मोहन मिश्र, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, शिव नारायण शास्त्री भिवानी तथा रामेश्वर दत्त शर्मा, पूर्व उपाध्यक्ष हरियाणा संस्कृत अकादमी एवं उनके साथ ही गवेश डीडी मेट्रो पर संस्कृत भाषा के समाचार वाचक उपस्थित थे।

कार्यशाला में सभी भारतीय लिपियों को संरक्षित व संवर्धित करने की तथा इन लिपियों के डिजिटलाइजेशन के लिए कार्य करने की बातों पर विचार हुआ।यह भी विचार हुआ कि भारत के युवाओं में इन लिपियों को प्रचलित करने के लिए तथा युवाओं का रुझान इन लिपियों की तरफ बढ़ाने के लिए रोजगारोन्मुख शिक्षा से जोड़ा जाए तथा इन लिपियों में सर्टिफिकेट कोर्स, डिप्लोमा कोर्स, डिग्री कोर्स आदि के लिए पाठ्यक्रम तैयार किया जाए। विश्वविद्यालय अपना पहला बैच विश्व संस्कृत दिवस अर्थात 26 अगस्त से गुडग़ांव में संस्कृत भाषी विद्वानों के लिए प्रारंभ करेगा ऐसी योजना भी बनी।

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