अयोध्या में राम मंदिर के नक्शे में नहीं होगा बदलाव

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Uttar Pardesh/Alive News: अयोध्या में राम मंदिर पुराने नक्शे पर ही बनेगा. राम मंदिर निर्माण के लिए बीते 25 वर्षों से तराशे जा रहे पत्थरों की शिल्पकारी का उपयोग किया जाएगा, साथ ही श्रीराम शिलाएं भी मंदिर में इस्तेमाल की जाएंगी. पुराने नक्शे और मॉडल पर ही बनेगा अयोध्या में रामलला का नया मंदिर बनेगा.

राम मंदिर के लिए बीते 25 वर्षों से पत्थर तराशे जा रहे हैं. इन पत्थरों में अद्भुत कलाकारी की गई है. देशभर से पूजित होकर आईं श्रीराम शिलाएं मंदिर की शोभा बढ़ाएंगी. पिछले 25 वर्षों से तराशे जा रहे पत्थरों की अद्भुत शिल्पकारी और देश भर से पूजित होकर आई श्रीराम शिलाएं भी मंदिर की साज-सज्जा बढ़ाएंगी.

अयोध्या में जन्मभूमि पर श्रीराम लला का मंदिर गुजरात के वास्तुशिल्पी परिवार के आर्किटेक्चर विशेषज्ञ चंद्रकांत सोमपुरा के बनाए डिजाइन और मॉडल पर ही बनेगा. अयोध्या की श्रीराम जन्मभूमि न्यास की कार्यशाला में 1989 से ही तराशे जा रहे शिल्पकला के अद्भुत नमूनों और पूरे देश भर से पूजित होकर यहां पहुंचीं श्रीराम शिलाओं का भी उपयोग मंदिर निर्माण में होगा.

पहली बैठक में होगी मंदिर निर्माण पर चर्चा
सूत्रों के मुताबिक 19 फरवरी को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र की पहली बैठक में इस पर भी चर्चा होगी. विश्व हिंदू परिषद के श्रीराम जन्मभूमि न्यास ने भी इसी शर्त पर नए न्यास को अपना समर्थन और जमा करोड़ों की धनराशि सौंपी है. सौंपी गई धनराशि में सोना, रत्न और नकदी सहित कुछ भूखण्डों पर स्वामित्व का अधिकार भी शामिल है.

न्यास के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक विहिप के न्यासियों और उनके प्रमुख महंत नृत्यगोपाल दास के बीच सहमति इस बात पर भी बनी कि नए न्यास में महंत नृत्यगोपाल दास की भी भूमिका और सम्मान सुनिश्चित किया जाएगा.

भारत की प्राचीन मंदिर शिल्पकला की नागर शैली में देश को सोमनाथ, स्वामीनारायण अक्षरधाम और अंबाजी जैसे प्रसिद्ध मंदिरों को आकार देने में पीढ़ियों से अपना योगदान कर चुके सोमपुरा परिवार के डिजाइन पर ही अयोध्या में रामलला का मंदिर उसी स्थल पर बनेगा, जहां अभी अस्थाई मंदिर में रामलला विराजमान हैं.

चंद्रकांत सोमपुरा ने तैयार किया था मॉडल
शिल्पी चंद्रकांत सोमपुरा ने 1987 में विहिप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंघल के कहने पर ये मॉडल तैयार किया गया था. इसमें वेदों में वर्णित मंदिर वास्तु कला के मुताबिक रंगमंडप, भोग मंडप और गर्भगृह के ऊपर ऊंचे कलात्मक शिखर की योजना होती है. चंद्रकांत सोमपुरा के मुताबिक देश के कुशल शिल्पियों ने बरसों बरस दिनरात मेहनत कर बंसी पहाड़पुर के लाल, बादामी और सफेद पत्थरों में ख़्वाब तराशे हैं. मॉडल और डिजाइन बदलने से इन शिल्पियों की 30 साल की अथक मेहनत बेकार होगी. नए डिजाइन पर पत्थर तराशने में खामखाह समय लगेगा. ये डिजाइन भारत की पीढ़ियों की आंखों ही नहीं, दिल दिमाग और ख्वाबों में बसा हुआ है.

डिजाइन के मुताबिक गुजरात के बंसी पहाड़ियों के पत्थरों की मज़बूती बेमिसाल और उम्र डेढ़ हजार साल से भी ज़्यादा होती है. जिस हिसाब से नक्शा बनाया है, उसमें अनुपातिक तौर पर आकार बढ़ाया जा सकता है. न्यास सूत्रों के मुताबिक श्रीराम लला मंदिर के अलावा सीता, लक्ष्मण, हनुमान और गणेश जी के मंदिर भी बनाने हैं. इसके अलावा अक्षरधाम की तरह सांस्कृतिक, पौराणिक और ऐतिहासिक गौरव को दिखाने वाले म्यूजियम, झांकियां और रिसर्च सेंटर भी बनेंगे.

अक्षरधाम के वास्तुशिल्प की तरह पूरे परिसर को घेरता हुआ कलात्मक सुसज्जित गलियारा भी होगा. यानी पूरे श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र की परिक्रमा. न्यास सूत्रों के मुताबिक कार्यशाला में बंसी पहाड़ियों से मंगाए गए पत्थरों की शिलाएं तराश कर कलात्मक खंभे, मूर्तियां, नक़्क़ाशी उकेरने का 60 फीसद से ज़्यादा शिल्प कार्य पूरा हो चुका है. इससे 151 फुट ऊंचे शिखर वाला मंदिर बनेगा.

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