तुरई के है ये फायदे जिन्हे जानकर आप रह जाएगे हैरान

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सेहतमंद रहने के लिए हमेशा से ही हरी सब्जियों का सेवन करने की सलाह दी जाती रही है। यह शरीर को कई तरह के लाभ पहुंचाकर स्वस्थ जीवन सुनिश्चित करती हैं। ऐसी ही एक हरी सब्जी है तुरई। कई लोग इसे खाना पसंद नहीं करते, पर बहुत से लोगों को इसका स्वाद बहुत भाता है। पोषक तत्वों से भरपूर होने की वजह से यह शरीर को कई तरह से फायदा पहुंचाती है। यह एक ऐसी बेल है, जिसका फल, पत्ते, जड़ और बीज सभी लाभकारी हैं। इसी वजह से हम इस लेख में तुरई के बारे में बता रहे हैं। यहां हम तुरई के फायदे के साथ ही अन्य जरूरी जानकारी देंगे। साथ ही अंत में तुरई के उपयोग और संभावित नुकसान के बारे में भी बताएंगे।

तुरई के फायदे

सिरदर्द के लिए तुरई के फायदे
माना जाता है कि तुरई सिर दर्द को भी ठीक करने में मदद कर सकती है। एनसीबीआई की वेबसाइट पर मौजूद एक शोध के मुताबिक तुरई के पत्ते और इसके बीज के एथनॉलिक अर्क दर्द को कम करने में सहायक हो सकते हैं। रिसर्च के अनुसार इसमें एनाल्जेसिक और एंटीइंफ्लामेटरी गुण होते हैं। यह दोनों गुण दर्द को कम करने और राहत दिलाने के लिए जाने जाते हैं।

डायबिटीज के लिए तुरई के फायदे
तुरई को पुराने समय से ही डायबिटीज को नियंत्रित करने वाली सब्जी के रूप में जाना जाता है। प्राचीन समय से चली आ रही इस मान्यता को लेकर चूहों पर शोध भी किया गया। इसी संबंध में एनसीबीआई की वेबसाइट पर भी भी एक अध्ययन उपलब्ध है। शोध में कहा गया है कि तुरई के एथनॉलिक अर्क में ग्लूकोज के स्तर को कम करने वाला हाइपोग्लाइमिक प्रभाव पाया जाता है। इसी प्रभाव की वजह से तुरई को डायबिटीज नियंत्रित करने के लिए लाभकारी माना जाता है।

पेचिश में तुरई के फायदे
पेचिश को रोकने में भी तुरई को लाभदायक माना गया है। सालों से तुरई के बीज में मौजूद नरम खाद्य हिस्से को पेचिश से राहत पाने के तरीके के तौर पर इस्तेमाल में लाया जाता रहा है । साथ ही इसके पत्तों को भी पेचिश के लिए लाभकारी माना जाता है।

कुष्ठ रोग
कुष्ठरोग के इलाज के लिए भी तुरई का इस्तेमाल पुराने समय में किया जाता रहा है। माना जाता है कि इसके पत्तों का पेस्ट बनाकर प्रभावित जगह में लगाने से कुष्ठ रोग को कम करने में मदद मिल सकती है। यह एक तरह का संक्रामक रोग है, जो जीवाणु माइकोबैक्टीरियम लेप्री की वजह से होता है। इस रोग में तुरई का कौन सा गुण मदद करता है यह स्पष्ट नहीं है। साथ ही यह भी ध्यान दें कि इस तरह के रोग के लिए घरेलू उपचार करना चाहें तो जरूर करें, लेकिन डॉक्टर से ट्रीटमेंट भी जरूर करवाएं।

दाद में तुरई के फायदे
रिंगवॉर्म (दाद) में भी तुरई को लाभदायक माना जाता है। इसकी पत्तियों को पीसकर, दाद प्रभावित जगह पर लगाने से आराम मिलने की बात कही जाती है। दरअसल, रिंगवॉर्म फंगस की वजह से होता है और तुरई में और इसके पत्तों के पानी से बने अर्क में एंटीफंगल गुण पाए जाते हैं। इसी आधार पर कहा जा सकता है कि दाद से राहत दिलाने में तुरई मदद कर सकता है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि यह कितना प्रभावशाली होता है।

तुरई के नुकसान
तुरई के नुकसान से ज्यादा शरीर को फायदे ही होते हैं। सब्जी के रूप में खाए जाने वाली तुरई को लेकर अधिकतर शोध चूहों पर हुए हैं, जिसकी वजह से इसके नुकसान स्पष्ट नहीं हैं। कुछ संभावित तुरई के नुकसान के बारे में हम नीचे बता रहे हैं. गर्भावस्था में इसे सुरक्षित नहीं माना जाता है। तुरई से बनी चाय में गर्भपात प्रभाव पाया जाता है।
इसके सेवन से लोगों को एलर्जी भी हो सकती है।

 

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