तिगांव भाजपा में राजनीति प्रतिद्वंदता, कही मनोहर लाल का 75 पार का सपना न कर दे चकना-चूर

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Faridabad/Alive News: फरीदाबाद भाजपा में स्टार प्रचारक के आगमन से पहले ही निजी हित साधने का दौर शुरू हो चुका है। तिगांव विधानाभा इस मामले में सबसे अग्रणी है। प्रधानमंत्री मोदी की रैली से पहले ही तिगांव भाजपा प्रत्याशी को पार्टी के बड़े नेता का साथ न मिलने से स्थिति अनुकूल नही है।

भाजपा प्रत्याशी ने इसकी शिकायत पार्टी हाईकमान और बुधवार को तीन विधानसभा में रैली को लेकर पहुचें मुख्यमंत्री मनोहर लाल को भी की। तिगांव विधानसभा की राजनीति बिसात की सुगबुगहाट दिल्ली तक पहुुंच गई है। इस सियासी बिसात के बिछने के बाद भाजपा प्रत्याशी के लिए इस चुनाव में ड़गर कठिन हो गई है।

इस बात से भी अंदाजा लगाया जा सकता है कि मुख्यमंत्री की रैली आखिरकार पृथला, बल्लबगढ़, एनआईटी और बड़खल विधानसभा में ही क्यों तय की गई? तिगांव विधानसभा मुख्यमंत्री की रैली से आख़िरकार क्यों महरूम है? क्या यह बिसात फरीदाबाद के बड़े नेता द्वारा तिगांव विधानसभा के प्रत्याशी से चल रही नाराजगी के चलते बिछाई गयी है? टिकट बटवारें में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले नेता ने ही यह टिकट दिलवाई और अब कुछ दिनों में ही ऐसा क्या हुआ जिससे की भाजपा प्रत्याशी और क्षेत्र का बड़े नेता जी एक दूसरे को फूटी आँख नहीं देख पा रहे है। इस पूरे खेल में नुकसान तिगांव भाजपा प्रत्याशी का है, नाकि क्षेत्र के बड़े नेता जी का। क्योंकि यह भाजपा के बड़े नेता इस सीट पर अपने बेटे को टिकट दिलवाना चाहते थे।

लेकिन भाजपा की परिवारवाद नीति के चलते तथा एक और हरियाणा के मंत्री के कारण टिकट नहीं दिलवा पाए। इस टीस को क्षेत्र के बड़े नेता इस चुनाव में निकालने की फ़िराक में है। अगर ऐसा होता है तो भाजपा को बिना तिगांव सीट के ही संतोष करना पड़ेगा। दो नेताओं की राजनीति प्रतिद्वन्दता के चलते मनोहर लाल का 75 का सपना अधूरा न रह जाये!

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