गर्भावस्था में डिहाइड्रेशन से बचने के लिए भरपूर मात्रा में पीए पानी : डॉ. बीना शर्मा

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Faridabad/Alive News : भीषण गर्मी और उसके बाद मानसून के फूहारे से मिलने वाली राहत का लुफ्त उठाना हर कोई पसंद करता है। यह मौसम खुशी की लहर तो लाता ही है पर अपने साथ कई संक्रमित बीमारियों को भी लेकर आता है। इस मौसम मेें जरा भी चूक महिलाओं के साथ-साथ उनके गर्भ में पल रहे बच्चें के लिए भी नुकसानदायक साबित हो सकती है। कुछ ऐसा कहना है बी.के अस्पताल की सलाहकार डॉ. बीना शर्मा का। उन्होंने बताया कि मानसून के कारण ओपीडी के मरीजों में इजाफा हुआ है।

डॉ. ने बताया कि ओपीडी में एक दिन में लगभग 200 से ज्यादा मरीज आ रहे है। जिनमें से मरीजों में अधिकत्तर वैजिना इन्फेकशन, पीआईडी (पेल्विक इफ्लेमेट्री डिजीज), एनीमिया की शिकायत देखने को मिल रही है। डॉ. ने कहा कि मानसून के कारण वातावरण में नमी के कारण कीटाणु गतिशील होते है।

जिसकी वजह से डेगूं, मलेरिया, जुकाम, फ्लू बुखार, त्वचा संक्रमण, खाद्य संक्रमण और पानी से होने वाले संक्रमण का खतरा दोगुना हो जाता है। डॉ. ने कहा मानसून में हुई हल्की सी बारिश के बाद गर्मी ज्यादा हो जाती है जिससे महिलाओं में डिहाइड्रेशन की प्रॉब्लम ज्यादा हो जाती है। इससे बचने के लिए ज्यादा से ज्यादा पानी पीना चाहिए।

ओआरएस का घोल पीना भी फायदेमंद होता है। उन्होंने धूप में ज्यादा न घूमने की सलाह दी। डॉ. ने जितना हो सके बाहर का तला व भूना, मिर्च-मसालेदार और स्ट्रीट फूड खाने से बचने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि घरों में सप्लाई हो रहे पानी में बैक्टीरियां की मात्रा अधिक होती है, इसलिए पानी को उबालकर ही पीए या हो सके तो फिल्टर पानी का प्रयोग करे।

डॉ. ने कहा कि घर में आस-पास पानी जमा न होने दे क्योंकि सबसे ज्यादा जलजनित बीमारी इसी मौसम में होती है। उन्होंने कहा कि ऐसे में पानी को तुरंत साफ कर दे और कहीं भी पानी जमा न होने दें। डॉ. ने कहा कि इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखकर गर्भवती महिलाएं भी बिना किसी मुश्किल के मानसून का आनंद उठाने के साथ-साथ स्वस्थ भी रह सकती हैं।

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