शायद, मैं राजनीति को समझ ना पाऊ, मैं राजनीति में नई जरूर हूं परन्तु एक अध्यापक होने के नाते यह जरूर जानती हूं कि बीस साल से क्षेत्र को चंद जयचंदों ने अपने हाथो की कठपुतली बनाया हुआ है। वह अपने पैसे और शराब के दम पर गरीब जनता का वोट हथिया लेते हैं। इन जयचंदो के कार्यालयों पर अभी से शराब के आहाते चल रहे हैं। मैं वार्ड-1 वासियों को सामाजिक और राजनैतिक अधिकार दिलाने आई हूं। अगर मेरे राजनीति में आने से सैक्टर-55, कृष्णा कालोनी, गांव गौच्छी के लोगों को गुंडे-बदमाशो और माफियाओं से स्वतंत्रता मिलती है, तभी मेरा राजनीति में आना साकार होगा है। रजनी खट्टर से चुनावी रणनीति और भविष्य की राजनीति के बारे में बातचीत की ‘अलाईव न्यूज’ के संपादक तिलक राज शर्मा ने उसके अंश इस प्रकार हैं…

– आपने एक अध्यापक से राजनीति में आने का मन कैसे बनाया ?
देखिए, मैं आपको बता दूं कि मैं आज भी राजनीति नहीं करना चाहती। बल्कि अपने पति संजय खट्टर के साथ मिलकर समाजसेवा करना चाहती हूं। क्योंकि खट्टर साहब यहां पिछले 20 सालों से समाजसेवा करते आ रहे है और वार्ड-1 से चुनाव जीतने के बाद मैं भी समाजसेवा ही करूंगी। हां, नगर निगम चुनाव लडऩे की बात है तो मैं आपको बता दूं कि मुझे राजनीति की एबीसी भी नहीं आती, मेरे मन में छल नही और ना ही मैं दूषित राजनीति की पक्षधर हूं। मेरा चुनाव लडऩे के पीछे वार्ड-1 की जनता का दुख: है और उनकी मूलभूत सुविधा हैं।

– आपका यह पहला निगम चुनाव है तो इसके लिए आपने क्या रणनीति तैयार की है ?
हां, मेरा ये पहला चुनाव है और मुझे राजनीति का अनुभव भी नहीं है लेकिन आज जनता शिक्षित और ईमानदार राजनेता ही चाहती है जोकि उनके कार्यो को करवा सके और जनता को हर फेस्लिटी दिला सके। मैं, एक अध्यापक हूं और सच्चाई ही मेरी पहचान है। मैंने अभी समाज की नींव को मजबूत करने का कार्य किया है लेकिन अब समाज के विकास के लिए कार्य करना चाहती हूं। अगर वार्ड-1 की जनता मुझे यह मौका देती है तो मैं वार्ड-1 को आर्दश वार्ड बनाने में कोई कसर नहीं छोडूंगी। रही बात चुनावी रणनीति की तो इसके लिए मैं डोर-टू-डोर कम्पेनिंग, सभाएं करना, लोगों से मिलना और उनकी समस्याओं को सुन रही हूं जिससे की समय आने पर हर समस्या का समाधान किया जा सके।

– आपके चुनाव का स्वरूप क्या होगा, ताकि सीट जीत सके ?
देखिए, मैंने आपको बताया कि मैं चुनाव राजनीति करने के लिए नहीं बल्कि समाजसेवा करने के लिए फाईट कर रही हूं और इस चुनाव में मेरा हथियार मेरी सच्चाई और ईमानदारी ही है। बाकी वार्ड-1 की जनता के ऊपर डिपेन्ड करता है कि उन्हें साफ छवि और ईमानदारी नेता चाहिए जोकि सुख-दुख में काम आए या फिर कोई डमी पीस, जोकि वोट के बाद गायब हो जाए। रही बात हार जीत की तो आप जानते है कि अखाडे में उतरे दो पहलवानों में से कोई एक ही जीतता है, लेकिन तैयारी दोनों ही बड़ी मेहनत से करते है। उसी प्रकार राजनीति भी एक गेम है और एरिया उसका अखाड़ा है जिसमें प्रत्याशी जाकर जनता के सामने अपना अनुभव, ईमानदारी और सुख-दुख के साथी होने का परिचय देते है। अब यह लोगों पर निर्भर करता है कि किसे वह अपना नेता चुनते है।

– आपका चुनावी एजेंडा क्या है ?
सर, आपको बता दंू कि मैंने अपने घोषणा पत्र में पीने के मीठे पानी का मुद्दा लिया है। मुझे वार्ड से पानी के टैंकरों का आतंक बंद करना है और प्रशासन से मांग करनी है कि मेरे वार्ड-1 में मजदूर लोग रहते है जो अपनी पूरे महीने की आधी सेलरी बोतल और टैंकर के पीने के पानी के लिए लुटा देते है। तथा उनके बच्चे इस वजह से पढाई और दो जून की रोटी से वंचित रह रहे हैं। इसके अलावा क्षेत्र के लोगों को वह सभी सुविधा दी जाऐंगी, जिसके वो हकदार हैं।

मैं वार्ड के लोगों को पीने के पानी, साफ-सफाई, सडक़, बिजली, गंदे पानी की निकासी तथा सीवरेज के लिए भटकने नही दूंगी। मेरे चुनावी एजेंडे में महिलाओं की सुरक्षा और शिक्षा भी अहम मुद्दा है। मैं आपको बता दूं कि मैंने विधवा, बुजुर्ग और विकलांगों की पेंशन के लिए संघर्ष किया है। अगर, लोगों ने साथ दिया तो इनको पेंशन के लिए नगर निगम के चक्कर नही काटने दूंगी और वार्ड में ही पेंशन बनाने और बांटने के कैम्प लगवाऊंगी।

-रजनी जी, हर उम्मीदवार अपने भाषणों में मूलभूत सुविधा को अपना प्रमुख एजेंडा बनाता है, क्या उपरोक्त समस्याओं को पूर्व पार्षद ने नहीं पूरा किया है ?
आपकी बात सही है, अगर वार्ड के लोंगों की समस्याओं को पूर्व पार्षदों द्वारा निदान किया होता तो मुझे चुनाव के लिए वार्ड-1 के लोग तैयार नही करते। इस बार फ्लाईट से आए हुए उम्मीदवारों को वार्डवासी सबक सिखाने की तैयारी में हैं। क्योंकि लोंगो ने बाहरी चुने हुए पार्षदो को आजतक वार्ड में नही देखा। जो पार्षद सदन की बैठक में लोगों की समस्या को लेकर न पहुंचे, वो जनता की समस्या भला कैसे दूर कर सकते है।

– आप चुनाव किसी पार्टी से लड़ रहे है या निर्दलीय ?
मैं निर्दलीय चुनाव लड रही हूं और जीत भी हासिल करूंगी। जनता को दो पत्तियों वाला बटन दबाकर मुझे विजयी बनाना है ताकि में निगम सदन तक उनकी बात को पहुंचाकर समस्या का समाधान करवा सकूं।

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