Faridabad/Alive news : भाजपा ने वार्ड-6 से सुरेन्द्र अग्रवाल को टिकट देकर यह सीट गवा दी है। क्योंकि सुरेन्द्र अग्रवाल नंगला रोड़ के क्षेत्र में विवादित लोगों में गिने जाते है। लगातार चुनाव सीजन में पिछले 20 वर्षो से अपनी बिरादरी को हाशिए पर लाकर खडे करने का काम करने वाले सुरेन्द्र अग्रवाल एक बार फिर निगम चुनाव में प्रत्याशी बनकर अपनी बिरादरी को मुर्ख मान रहे है। सुरेन्द्र अग्रवाल ने छोटे-छोटे झगड़े हों या फिर प्रॉपर्टी के खेल में कब्जा करने की बात हो, तो एक विशेष बिरादरी के सहयोग से अपनी ही बिरादरी के लोगों को शिकार बनाया है। वार्ड-6 में निर्दलीय उम्मीदवार पूर्वमंत्री शिवचरण लाल शर्मा के पुत्र मुनेश शर्मा, विधीचंद भारद्वाज और संतोष यादव मुकाबले में है।

वार्ड-6 की जनता ने बसपा और भाजपा उम्मीदवारों को नकार दिया है। क्योंकि भाजपा के उम्मीदवार विवादित है और बसपा के उम्मीदवार सैक्टर-55 से चुनाव लडऩे के लिए वार्ड-6 में आए है। वार्ड में बसपा प्रत्याशी को लेकर भी कई तरह के विरोध जताए जा रहे है। वार्ड-6 से बसपा नेता रतनपाल पिछले दो साल से तैयारी कर रहे थे, लेकिन पार्टी ने उन्हे टिकट न देकर किसी बाहरी व्यक्ति को कंैडिडेट बनाया है। एक कारण यह भी माना जा रहा है कि वार्ड-6 के दलीत नेता बाहरी कैंडिडेट का विरोध अन्दर खाते कर रहे है। उधर, संतोष यादव के पूर्वांचल और प्रवासी परिषद के पदाधिकारी होने से बहुत बड़ा वोट बैंक साईलेंट रूप से उनके साथ लगा हुआ है।

विधिचंद भारद्वाज ने खंड-बी के वोट बैंक पर एकतरफा कब्जा किया हुआ है। विधिचंद भारद्वाज पिछले निगम चुनावों में भी दमखम आजमाते दिखाई दिए थे, लेकिन बिरादरी एवं पंचायत के दबाव में पूर्व मंत्री पंडि़त शिवचरण लाल के समर्थन में बैठ गए थे। इस बार पूर्व मंत्री के पुत्र मुनेश शर्मा का जमकर विरोध कर रहे है। वहीं वार्ड-6 के मजबूत और जीताऊ उम्मीदवारों में मुनेश शर्मा को माना जा रहा है। मुनेश शर्मा की जीत का कारण पूर्व मंत्री के द्वारा पिछले अपने कार्यकाल में किए गए विकास कार्यो को माना जा रहा है। वार्ड-6 में मुनेश शर्मा का वोट बैंक चारो ओर है। जबकि भाजपा के प्रत्याशी सुरेन्द्र अग्रवाल मोदी और कृष्णपाल की छवि के कारण अपने आप को जीत में शामिल कर रहे है। हालांकि बकौल सुरेन्द्र अग्रवाल आज भी बंद कमरो में चर्चा करते हुए दिखाई पड़ रहे हैं कि इस बार उनकी जीत को सौ-सौ ग्राम तोलने वाले भी नही रोक सकते।

एक जाति विशेष के गुंडे तत्वों का समर्थन करने वाले भाजपा के वार्ड-6 के प्रत्याशी सुरेन्द्र अग्रवाल की छल-कपट की राजनीति को नंगला रोड़ मार्किट के लोग अभी भूले नही है। नंगला रोड़ के व्यापारी वर्ग से लेकर बनिया बिरादरी के लोग भी सुरेन्द्र अग्रवाल को जमीनी हकीकत का आभास करने का मन बना चुके है। अपने पैसे के दम पर अवैध फ्लॉटिंग से लेकर लोगों को धमकियां देने का काम करने वाले उक्त प्रत्याशी को वार्ड-6 के लोगों ने घरों पर पोस्टर और झण्डे लगाने तक से मना कर दिया है। हालांकि गुडंा गर्दी के दम पर भाजपा प्रत्याशी ने कुछ दुकानो और मकानों पर झण्डे टिकवा दिए है। एक महिला ने नाम न छापने के एवज में बताया कि सुरेन्द्र अग्रवाल के करीब आधा दर्जन समर्थकों ने जबरन हमारे मकानों पर झण्डे और पोस्टर लगा दिए है। शिकायत की बात पर महिला ने कहा कि चुनावी दौर में शिकायत सुनने के लिए कोई अधिकारी नहीं है।

इतना ही नहीं उक्त महिला ने अपने आस-पास की महिलाओं के साथ मिलकर इसकी शिकायत अपने समर्थन प्रत्याशी से भी की है। लेकिन चुनाव की व्यस्तता के कारण उक्त प्रत्याशी ने उन महिलाओं की शिकायत लेकर चुनाव आयोग को भेजने का आश्वासन दिया है। इतना ही नहीं वार्ड-6 के भाजपा प्रत्याशी सुरेन्द्र अग्रवाल के खिलाफ एनआईटी विधानसभा क्षेत्र के शिक्षाविदों ने अंदर खाते मोर्चा खोला हुआ है। क्योंकि पिछले दिनों सुरेन्द्र अग्रवाल ने क्षेत्र के ही एक शिक्षाविद की जमीन पर अपने गुंडा तत्वों के साथ मिलकर कब्जा करने की कोशिश की थी। इसमें सुरेन्द्र अग्रवाल की ओर से केन्द्रीय राज्यमंत्री का हिस्सा होने की बात की भी चर्चा रही थी। लेकिन शिक्षाविद के मजबूत होने के कारण भाजपा की खाल ओढ़े इस प्रत्याशी को बेईज्जत होकर घर बैठना पड़ा था।

यह मामला पुलिस तक भी पहुंचा था। पाठकों को बता दे कि चुनाव में भाजपा प्रत्याशी सुरेन्द्र अग्रवाल के साथ खुद का समाज साथ नहीं है। क्योंकि नंगला रोड़ के बनिया बिरादरी में इसका विरोध पहले से ही है। वार्ड-6 में नंगला रोड़ के एक बड़े व्यापारी हीरा पंसारी ने निर्दलीय उम्मीदवार संतोष याादव को अपना समर्थन देकर साबित कर दिया सुरेन्द्र अग्रवाल से नंगला रोड़ के व्यापारी खुस नहीं है। इससे साफ होता है कि भाजपा ने सही उम्मीदवार को टिकट न देकर सीट गवां दी है।

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