जब जिंदगी बचाने वाले इंजेक्‍शन ने ही ली थी 21 बच्‍चों की जान

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Mumbai/Alive News : मुंबई के बी वाई एल नायर अस्‍पताल में छह साल पहले 21 बच्‍चों की मौत के पीछे हैरान करने वाली वजह सामने आई है। इस सिलसिले में हुए अडवांस्‍ड टेस्‍ट से पता चला है कि इन बच्‍चों की मौत दूषित ऐंटीबायॉटिक इंजेक्‍शन की वजह से हुई थी। इस ऐंटीबायॉटिक दवा के वायल में वही बैक्‍टीरिया पनप रहा था, जिसके इलाज के लिए यह इस्‍तेमाल की जाती है।

ये मौतें मुंबई सेंट्रल के पास मौजूद नायर अस्‍पताल के बाल विभाग ओर आईसीयू में 2012 और 2013 के बीच हुई थीं। इसमें कम से कम 76 बच्‍चे प्रभावित हुए थे। इस बैक्‍टीरिया का नाम burkholderia cenocepacia complex (BCC) है।

BCC कई ऐंटीबायॉटिक्‍स के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर चुका है और अस्‍पताल में भर्ती मरीजों के बीच इन्‍फेक्‍शन फैलाता है। इसे लेकर मेडिकल जगत काफी परेशान है। नायर अस्‍पताल के डॉक्‍टरों, सीएसआईआर और पीजीआई चंडीगढ़ के विशेषज्ञों ने अपने परीक्षणों के बाद पता लगाया कि यह बैक्‍टीरिया ऐंटीबायॉटिक amikacin के अंदर पनप रहा था।

भारत के अस्‍पतालों में मौजूद है यह बैक्‍टीरिया
पहली बार किसी परीक्षण में यह साबित हुआ है कि बीसीसी नामका यह बैक्‍टीरिया भारत के अस्‍पतालों में मौजूद है। यह उसी दवा से अपना पोषण लेकर पनपता है, जो इसे खत्‍म करने के लिए बनाई गई है। जब 2012 में बच्‍चों का ब्‍लड टेस्‍ट किया गया था, उसी समय यह बैक्‍टीरिया फैल गया।

पीजीआई के माइक्रोबायॉलजी के प्रफेसर डॉ. विकास गौतम का कहना था, ‘मॉलिक्‍यूलर टेस्‍ट से हम यह पता लगाने में कामयाब हुए हें कि यह बैक्‍टीरिया ऐंटीबायॉटिक के वायल में ही पनप रहा था। नायर अस्‍पताल के माइक्रोबायॉलजी विभाग की प्रमुख डॉ. जयंती शास्‍त्री के मुताबिक, ‘इस स्‍टडी से पता चलता है कि इन्‍फेक्‍शन में अचानक बढ़ोतरी के समय माइक्रोबायॉलजिस्‍ट और फिजिशन को सतर्क रहना चाहिए।’

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