अल्पमत की मनोहर सरकार पर क्यों है इतने संकट ?

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Tilak Raj Sharma/Alive News
Faridabad: भाजपा के लिए विधानसभा की चुनौती के बाद गठबंधन में मंत्रिमंडल के गठन और जजपा और भाजपा द्वारा मेनिफेस्टो में किए गए वायदों के तालमेल पर हरियाणा की जनता की आँखें लगी हुई है। भारतीय जनता पार्टी भले ही हरियाणा में वोट प्रतिशत को बढ़ाने में कामयाब रही हो लेकिन मुख्यमंत्री मनोहर लाल के 75 पार की नारे ने भाजपा के दिग्गजों की भौहे नीचे कर दी है।

अब बात भाजपा और जजपा के मंत्रिमंडल में तालमेल को लेकर खींचतान ने हरियाणा की राजनीति को और रोमांचक बना दिया है। भाजपा हरियाणा के प्रत्येक जिले को एक मंत्री देना चाहती है तो उधर जजपा भी अपने खास नेताओं को मंत्रिमंडल और बोर्डों के सदस्य से लेकर चेयरमैन तक लिस्ट बनाए हुए है। ऊपर से नयी सरकार के विधानसभा की पहली बैठक 4 नवंबर को होनी तय हुई है। ऐसे में भाजपा हाईकमान की नजर हरियाणा के साथ-साथ महाराष्ट्र पर भी बनी हुई है।

उधर महाराष्ट्र में भाजपा के सहयोगी दल शिवसेना के संजय राउत द्वारा दुष्यंत चौटाला के पिता को लेकर बयान दिया है। उससे उपजे राजनैतिक घमासान से भाजपा का उभर पाना मुश्किल हो रहा था। लेकिन इस समय हरियाणा की सरकार को चलाने के लिए मंत्रिमंडल का गठन विधानसभा स्तर से पहले गठित करना मनोहर लाल के लिए अंगारों पर चलने के बराबर हो रहा है। मनोहर लाल द्वारा सबसे पहले विधानसभा स्पीकर की नियुक्ति जरुरी है।

वो भी भाजपा और RSS समर्थित विधायक की इसके बाद भाजपा की टिकट पर जीतकर आए विधायकों को मंत्रिमंडल में व्यवस्थित करना है। इसमें भी निस्पादित करने की जरुरत है। हरियाणा भाजपा के पुराने दो या तीन बार से विधायकों को इस बार मंत्रिमंडल में शामिल करने पर हाईकमान के आदेश को भी मनोहर लाल सरकार को मानने की जरुरत है। इससे पहले भाजपा- जजपा को विपक्ष और जनता के सामने अपने मुद्दों को स्पष्ट करना होगा कि जनता के बीच में चुनाव के समय भाजपा- जजपा ने जो वायदे अपने मेनिफेस्टों में किए थे उनका क्या ? ये सभी संकट मनोहर लाल सरकार पर मंडरा रहे है जो कि अल्पमत सरकार के लिए अगर पूरे नहीं हुए तो संकट माने जा सकते है।

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