बी.के.अस्पताल में डॉक्टर और नर्सो की कमी, मरीज बेहाल

आबादी के हिसाब से दुनिया के दूसरे सबसे बड़े देश भारत में स्वास्थ्य सेवाएं भयावह रूप से लचर हैं और यह लगभग अराजकता की स्थिति में पहुंच चुकी है। भारत उन देशों में अग्रणीय है जिन्होंने अपने सावर्जनिक स्वास्थ्य का तेजी से निजीकरण किया है और सेहत पर सबसे कम खर्च करने वाले देशो की सूची में बहुत ऊपर है। यहां हरियाणा के स्वास्थ मंत्री अनिल विज सरकारी अस्पतालों की स्थिति सुधराने और मरीजों को बेस्ट फेस्लिटी देने के ख्वाब देख रहे है, वहीं तकरीबन 15 लाख की आबादी वाले शहर फरीदाबाद में बने एकमात्र सरकारी अस्पताल बादशाह खान(बी.के.अस्पताल) अभी भी पूराने ढर्रे पर ही चल रहा है और मरीजों को ईलाज के नाम पर लाल, पीली दवाईयां ही दे रहा है। अस्पताल में गंभीर स्थिति में आने वाले मराजों के पास दो ही विकल्प होते है या तो लाल, पीली दवाईयां खाए नहीं तो रेफर हो जाए क्योंकि अस्पताल में मरीजों के लिए बेहतर सुविधाओं का अभाव है। अस्पताल में मरीज तो है लेकिन उनका इलाज करने के लिए डॉक्टरों और नर्सो की भारी कमी है। ऐसे में आप सोच सकते है की अस्पताल में मरीजों को किस तरह की सुविधाएं मिल रही होंगी। बी.के.अस्पताल की व्यवस्था और मरीजों की मनोदशा को लेकर अलाईव न्यूज के संवाददाता शफी सिद्दकी ने जब अस्पताल के पीएमओ विरेन्द्र यादव से बातचीत की तो उन्होंने कुछ इस तरह के जवाब दिए….

– अस्पताल में इमरजेंसी वार्ड की क्या स्थिति है, क्या किसी अप्रिय घटना में इमरजेंसी वार्ड कारगर साबित होगा या नही ?
मैं आपको बता दूं, अस्पताल में इमरजेंसी वार्ड बड़ा और सभी सुविधाओं से लेस है। इसको उतना ही बड़ा बनवाया गया है जितने की आवश्यकता है। वहीं किसी अप्रिय घटना के घटित होने पर डिजास्टर वार्ड को खाली करा दिया जाता है, डिजास्टर के लिए मेडिसन तैयार होनी चाहिए। वहीं वेज्डप्लेस तैयार होना चाहिए। इसके लिए इमरजन्सी के बाहर का एरिया वेज्ड एरिया में कन्वर्ट कर दिया जाता है।

डिजास्टर कवर्ड हमारे यहां तैयार पड़ी हुई है। किसी भी मौमेंट पर मिनिमम 30 प्रशेंट को हेंडल करने के लिए डिस्ट्रिक लेवल पर एक डिजास्टर रूम तैयार किया जाता है। डिजास्टर मौमेंट को हेंडल करने के लिए हमने एक मेडिसन सेल तैयार कर रखी है और रूम ओलरेडी अंडरप्रोसेस है। मैं आपको बता दूं कि 2015 में गर्वमेंट ऑफ हरियाणा और गर्वमेंट ऑफ इंडिया मोक ट्रायल कर चुकी है। जिसमें 100 के करीब मरीजों को हम हेंडल कर चुके है। अगर, यह ट्रायल सक्सेस ना होता तो अब तक इसकी सुचना हमारे पास आ चुकी होती। हमारे पास इतना अवेलेवल रिसोर्सिस है जोकि डिजास्टर को हेंडल कर सकते है।

– अस्पताल में निक्कू वार्ड में वेंटिलेटर की समस्या बरकरार है इस पर क्या कहना है ?
हां, निक्कू वार्ड में वेंटिलेटर की समस्या है लेकिन वेंटिलेटर के लिए ओलरेडी अस्पताल से दो डॉक्टरों को 1 अप्रैल से 3 माह की ट्रेनिंग पर भेजा गया है उनके प्रशिक्षण के बाद से यह समस्या भी खत्म हो जाएगी और बच्चों को अच्छी सुविधाएं मिल सकेगी।

-स्वास्थ मंत्री की अस्पताल के लिए 15 डॉक्टरों और स्टाफ नर्सो की घोषणा कहां तक सिरे चढ़ी ?
आपको बता दूं, हमारे यहां स्वास्थ मंत्री की घोषणा के बाद अभी तक कोई डॉक्टर नही आया और न ही स्टाफ नर्सो की नियुक्ति हुई है बल्कि जो पहले थी उनकी संख्या और कम कर दी गई है। अस्पताल में पहले हमारे पास 23 नर्सो का स्टाफ मौजूद था लेकिन वत्र्तमान में इनकी संख्या घटकर 19 रह गई है, जोकि 90 नर्सो के अगेन्सट काम कर रही है। देखिए, मेरे पास स्पेस अवेलेवल है लेकिन स्टाफ और फण्ड सरकार को ही देना है। जिस दिन परमिशन आ जाएगी हम उसे पूरा कर देंगे। इसके लिए हमने सरकार को खूब लेटर लिखा लेकिन अभी तक हमारी अर्जी पर कोई सुनवाई नहीं की गई है।

-अस्पताल में मरीजों को क्या-क्या सुविधाएं मुहैया कराई जा रही है ?
बी.के.अस्पताल में मरीजो के लिए एमआरआई और सीटीस्केन की सुविधाएं शुरू की जा चुकी है। इसके साथ ही डायलेसिस के लिए अभी काम चल रहा है वो भी 3 माह में शुरू हो जाएगा, इसके टेंडर अलॉट हो चुके है। डायलेसिस के लिए 18 अप्रैल को सेकेंड फ्लोर पर जगह भी अलॉट की जा चुकी है। मरीजों की सहुलियत के लिए पेशेंट रजिस्ट्रेशन को पूरी तरह से कम्प्यूटराईज किया गया है।

रजिस्ट्रेशन काउंटर 3 से बढ़ा कर 7 कर दिए गए है। जिसमें नए रजिस्ट्रेशन के 4 और पुराने के 2 और इमरजेंसी का एक इनडिपेंडेंट है। वहीं लैब के काउंटर 1 से बढ़ाकर 3 कर दिए गए है। वहीं गर्भवति महिलाओं का काउंटर अलग रखा गया है ताकि उन्हे कोई समस्यां न हो इसके साथ ही पंखे और सभी फ्लोरो पर वाटर कूलर की सुविधा पर्याप्त है।

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